Category: पुस्तक समीक्षा,
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सहजता की बानगी ‘एकालाप’ कविता संग्रह – डॉ.राजेन्द्र टोकी
‘एकालाप’ को पढ़ते हुए मुझे सबसे पहले ग़ालिब के शे’र याद आए–मौत का एक दिन मुअय्यन हैनींद क्यों रात भर नहीं आती—हो चुकी ग़ालिब बलाएँ सब तमामएक मर्ग -ए- नागहानी और है हिन्दी में मौत पर बहुत कम लिखा गया है।इक्का दुक्का किसी कवि ने भले एक दो कविताएँ लिखी…
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लघुकथा-संग्रह ‘सूत्रधार’ का लोकार्पण
मित्रो,19 जून को भोपाल में लघुकथा शोध-केन्द्र् समिति के वार्षिक अधिवेशन में मेरे तीसरे लघुकथा-संग्रह ‘सूत्रधार’ का लोकार्पण रविंद्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी के कुलपति संतोष चौबे,साक्षात्कार पत्रिका के सम्पादक विकास दवे,कथा बिम्ब के सम्पादक प्रबोध कुमार गोविल,विष्णु प्रभाकर के सुपुत्र अतुल प्रभाकर,डा. मिथिलेश अवस्थी और शोध केंद्र की निदेशक कांता राय…
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हिन्दी लघुकथा की उपस्थिति और सामाजिक परिदृश्य – प्रो. मलय पानेरी
साहित्य में लघुकथा एकदम नयी विधा नहीं है। इसका चलन भी अन्य विधाओं की तरह बहुत पुराना है लेकिन अभी कुछ दशकों से यह अधिक लिखी-पढ़ी जा रही है। किसी कथा का बड़ा होना महत्त्वपूर्ण नहीं है और न ही लघु होना महत्त्वपूर्ण है। दोनांे ही स्थितियों में कथा का…
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बघेली अंचल के रचनाकारों में लघुकथा लेखन के प्रति एक नयी चेतना का विकास होगा – डॉ. राम गरीब पाण्डेय ‘विकल’
‘ऐसा ही’ से ‘ऐसा भी’ तक लघुकथाएँ वर्तमान तकनीकी विकास के युग में, विश्वग्राम की परिकल्पना को मूर्त करने और दिनोंदिन उसे पुख्ता करने के लिए दुनिया भर के तमाम देश, अपने-अपने सामर्थ्य भर विकास की इस दौड़ में सहभागिता दर्ज करवा रहे हैं। विकास के नित नूतन कीर्तिमान स्थापित…
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डॉ. विकल का यह लघुकथात्मक कार्य बघेली बोली को भी समृद्ध करेगा – डॉ. अशोक भाटिया
मित्रो, एक ही समय में लघुकथाओं पर संपादित किताबों का बघेली, गढ़वाली व अवधी में आना उत्साहवर्धक है।राम गरीब पाण्डेय ‘विकल’ द्वारा ‘देश विदेश से लघुकथाएं’ नाम से बघेली में अनुवाद व प्रकाशन, डा.कविता भट्ट द्वारा लघुकथा डॉट कॉम में गढ़वाली में अनूदित लघुकथाओं का पुस्तक रूप में प्रकाशन और…
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विश्व पुस्तक मेले में डा.निधि अग्रवाल की उपन्यासिका ‘अप्रवीणा’ का लोकार्पण
विश्व पुस्तक मेले में बोधी प्रकाशन से प्रकाशित हुई उपन्यासिका ‘अप्रवीणा’ का लोकार्पण भारती लघुकथा के प्रमुख हस्ताक्षर अशोक भाटिया जी के द्वारा किया गया। इस दौरान खुद डॉ. नीधि अग्रवाल सहित बोधी प्रकाशन के संयोजन माया मृग सहित अन्य साहित्यकार उपस्थित हुए। हमेशा ही ऐतिहासिक पात्रों पर उपन्यास लेखन…
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नवांकुर लेखकों के लिए जरूरी किताब ‘परिंदे पूछते हैं’, डॉ. उमेशचंद्र सिरसवारी
‘इसमें प्रश्नकर्ता ये सभी नवलेखक वृंद हैं, जो लघुकथा लेखन करते हुए अब तक भ्रामक स्थितियों झेल रहे हैं। वे सभी कथानक के चुनाव पर, तो कभी बातों के दोहराव पर उलझन महसूस करते हैं; कभी लघुकथा का ढीलापन उन्हें विचलन देता है, तो वहीं कालखंड दोष बड़ा-सा प्रश्नवाचक चिह्न…
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साहित्य में विधा से ज़्यादा विषय वस्तु का सम्यक् निर्वहन ज़रूरी – डॉ. अशोक भाटिया
भोपाल लघुकथा शोध केंद्र समिति भोपाल के पुस्तक पखवाड़े -2024 का तृतीय सत्र भोपाल | साहित्य में विधा से अधिक विषय वस्तु का निर्वहन ज़रूरी है ,रचनाकार को जैसी ज़रूरत है वैसे विषय का चयन करे | लघुकथा लेखन से उपन्यास लेखन तक का सफ़र किसी लेखक की महत्वपूर्ण यात्रा…
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साहित्यकार अशोक भाटिया की समस्त विडियो
भारतीय लघुकथा के प्रमुख हस्ताक्षर और मार्गदर्शक डा. अशोक भाटिया लगभग पांच दशकों से साहित्य क्षेत्र में सक्रीय हैं। उन्होंने अब तक 40 से अधिक पुस्तकों का लेखन और संपादन किया है। हरियाणा, पंजाब, बंगाल, उतर प्रदेश, मध्यप्रदेश राज्यों सहित कई राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर की साहित्यक संस्थाओं ने उनको पुरस्कार…
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‘सवाल-दर-सवाल’ से हल हुए कई सवाल : डाॅ बीना, गुरुग्राम
(रमेश बत्तरा के कृतित्त्व पर आधारित अशोक भाटिया द्वारा संपादित पुस्तक) इन दिनों लघुकथा का बिगुल बज रहा है| चहुँ ओर इसका महिमामंडन हो रहा है| पत्र- पत्रिकाओं में भी इसके खूब दर्शन हो रहे हैं , पुस्तकों में छाप छोड़ी जा रही है पर एक समय था जब गद्य-…